Menu

Amrud अमरुद के गुण-धर्म फायदे एवं घरेलू उपचार – Guava Benefits Home Treatment In Hindi

हिंदी अमरुद, सफरी
संस्कृत पेरुक, दृढबंजती, बहुबीज
अंग्रेजी Guava
पंजाबी ਪੇਵਾ
मराठी पेआवा, प्रेरु, जाम
बंगाली পেয়ারা, चिचारा, गोआर्चाफल
गुजरातीપેરુ, जानफल, जमरुख
तेलगू జామ, गोइया

अरबी جوافة, कमसुरा
कन्नड़ ಗೌವಾ, शिवे
तमिल கொய்யா

अमरुद के औषधीय गुण एवं उपचार विधि: Amrood Khane ke Fayde, Amrud ke Labh.

अमरुद के औषधी प्रयोग निम्न रोग में किये जाते है – गठिया, सिर दर्द, दन्त रोग, ज्वर(बुखार), खांसी, जुकाम, मुँह के छाले, दस्त, कब्ज, वमन (उल्टी),  पेचिश, मानसिक तनाव, मांसपेशियों का ऐंठन, रक्त-संचार, प्यास,  भगंदर, पित्त की जलन आदि बीमारियों के इलाज में अमरुद के औषधीय चिकित्सा प्रयोग निम्नलिखित प्रकार से किये जाते हैं:- Guava ya Amrud ke Gun, Amrud ke Aushadhiy Prayog, Amrud ke Fayde, Amrud se Labh, Amrud ke Gharelu Upchar, Amrud ke Aaurvedik Prayog, Amrud ke Aushadhiy Gun evan Sevan Upchar Vidhi.

अमरूद के फायदे, लाभ एवं घरेलू उपयोग Amrud ke Gharelu Upchar 

अमरुद के फल से भारत के सभी लोग परचित है, अमरुद का गुदा लाल और सफेद दो रंगों में होता है। स्वाद में भी खट्टा, मीठा दो-तीन प्रकार का होता है। वर्षा ऋतु की अपेक्षा शरद ऋतु के फल अधिक मीठा तथा स्वादिष्ट होते है। यह कृषिजन्य तथा वन्यज दोनों अवस्थाओं में पाया जाता है।

अमरुद के औषधीय बाह्य -स्वरूप

अमरुद का वृक्ष 15 से 25 फुट तक ऊँचा होता है। अमरुद के पत्ते 3-6 इंच तक लम्बे छोटी-छोटी टहनियों पर कहीं विपरीत और कहीं एकांतर लगे रहते है। काण्ड मृदु, बहुशाखीय तथा पुष्प छोटे पाये जाते है।

अमरुद के औषधीय रासायनिक संगठन

अमरुद की जड़ व छाल में टेनिक एसिड काफी मात्रा में पाया जाता है। तथा कैल्सियम ऑक्जेलेट भी अमरुद में पाये जाते हैं। अमरुद के पत्तों में राल, वसा, टेनिन, उड़नशील तेल, हरित और खनिज लवण होते हैं। अमरुद के पेड़ में फास्फोरिक अम्ल सत्व के साथ मिले हुए चूना तथा मैगनीज वर्तमान होते है। अमरुद में विटामिन (बी) तथा (सी) दोनों पाये जाते हैं।

अमरुद के औषधीय गुण-धर्म Amrud ke Aushadiy Gun Dharm

अमरुद के फल, स्वादिष्ट, शुकर्वधर्क, तृषाशामक हृदय को बल देने वाले, कृमिघ्न एवं वमन (उल्टी) नाशक है। अमरुद रेचक तथा कफ निःस्सारक है।

Amrud ke Gharelu Upchar

गठिया में अमरुद के औषधीय प्रयोग गुण एवं उपचार विधि:

गठिया में अमरुद के कोमल पत्तों को पीसकर गठिया के दर्द में युक्त स्थानों पर लेप करने से आराम मिलता है।

सिर दर्द में अमरुद के औषधीय गुण एवं उपचार विधि:

सिर दर्द में अमरुद को पत्थर पर घिसकर जहाँ दर्द होता है, उस जगह पर खूब अच्छी तरह लेप कर देने से सिर दर्द में लाभ होता है, अगर दर्द शुरू हो गया हो तो शांत हो जाता है। यह प्रयोग दिन में तीन -चार बार करना चाहिए।

दन्त रोग में अमरुद के औषधीय प्रयोग गुण एवं उपचार विधि:

दन्त रोग में अमरुद के 3-4 पत्तों को चबाने या पत्तों के काढ़े में फिटकरी मिला कर कुल्ला करने से दांत की पीड़ा दूर हो जाती है।

ज्वर (बुखार) में अमरुद के औषधीय गुण एवं उपचार विधि:

बुखार में अमरुद के कोमल पत्तों को पीस-छानकर रोगी को पिलाने से बुखार में लाभ मिलता है।

खांसी में अमरुद के औषधीय गुण एवं उपचार विधि:

1. यदि सुखी खांसी हो और कफ न निकलता हो तो, सुबह ही सुबह ताजे एक अमरुद को तोड़कर, चाकू की सहायता के बिना चबा -चबा कर खाने से खांसी दो -चार बार खाने से सुखी खांसी में लाभ होता है।
2. खांसी में अमरुद का भबक का अर्क निकालकर अमरुद में शहद मिलाकर पीने से सूखी खांसी में लाभ होता है।
3. यदि बलगम खूब गया हो और खांसी अधिक हो, दस्त साफ़ न हो हल्का बुखार भी हो तो अच्छे ताजे मीठे अमरूदों को पेट भर कर खायें। खांसी में आराम मिलता है।
4. यदि जुकाम की साधारण खांसी हो तो अधपके अमरुद को आग में भूनकर नमक लगाकर खाने से खांसी में लाभ होता है।

जुकाम में अमरुद के औषधीय प्रयोग गुण एवं उपचार विधि:

जुकाम के रोगी को अमरुद के एक अच्छा बड़ा बीज निकालकर खिला दें और उसके बाद ताजा जल रोगी नाक बंद करके पी ले। दो तीन दिन में ही रुका हुआ जुकाम बहकर निकल जायेगा। दो-तीन दिन बाद अगर स्राव रोकना हो तो 50 ग्राम गुड़ सोते समय बिना जल पीये गुड़ को खा लें। जुकाम में लाभ होता है।

मुँह के छाले में अमरुद के औषधीय गुण एवं उपचार विधि:

मुँह के छाले में अमरुद के कोमल पत्तों में कत्था मिलकर पान की तरह चबाने से मुँह के छाले ठीक हो जाते है।

दस्त में अमरुद के औषधीय गुण प्रयोग एवं उपचार विधि:

1. बच्चे का पुराना दस्त मिटाने के लिए अमरुद की जड़ 15 ग्राम 50 ग्राम जल में मिलाकर जब आधा जल शेष रह जाये तो 6-6 ग्राम तक दिन में दो-तीन बार पिलाना से बच्चो के दस्त में लाभकारी होता है।
2. कच्चे अमरुद के फल का काढ़ा बनाकर खिलने से भी दस्त मिटता है।
3. दस्त में अमरुद की छाल व अमरुद के कोमल पत्तों का 20 मिलीलीटर काढ़ा पिलाने से हैजे की प्रारम्भिक अवस्था में लाभ होता है।

कब्ज में अमरुद के औषधीय प्रयोग गुण एवं उपचार विधि:

कब्ज में अमरुद को नाश्ते के समय काली मिर्च, कला नमक, अदरक के साथ खाने से गैस, अफारा और कब्ज दूर होकर भूख लगने लगती है। अमरुद को खाना के साथ खाने से भी संग्रहणी और अतिसार में आराम मिलता है।

वमन (उल्टी) में अमरुद के औषधीय प्रयोग गुण एवं उपचार विधि:

वमन या उल्टी में अमरुद के पत्तों का काढ़ा बनाकर 10 ग्राम पिलाने से वमन उल्टी बंद हो जाती है।

पेचिश में अमरुद के औषधीय प्रयोग गुण एवं उपचार विधि:

पेचिश में अमरुद का मुरब्बा प्रवाहिका (पेचिश) एवं अतिसार में लाभदायक है।

मानसिक तनाव में अमरुद के औषधीय गुण एवं उपचार विधि:

मानसिक तनाव में अमरुद के पत्तों का काढ़ा बना कर मस्तक में लेप करने से मानसिक तनाव, वृक्क प्रवाह ओर शारीरिक एवं मानसिक विकृत स्थिति में प्रयोग किया जाता है।

मांसपेशियों का ऐंठन में अमरुद के औषधीय प्रयोग गुण एवं उपचार विधि:

मांसपेशियों का ऐंठन में अमरुद के पत्तों का अर्क या टिंचर को बच्चों की रीढ़ की हड्डी पर मालिश करने से उनके मांसपेशियों का ऐंठन दूर हो जाता है।

रक्त-संचार में अमरुद के औषधीय गुण एवं उपचार विधि:

रक्त-संचार में अमरुद के फलों के बीज निकाल कर बारीक-बारीक़ कतरकर शक़्कर के साथ धीमी आग पर बनाई हुई चटनी रक्त-संचार के लिए अत्यधिक लाभकारी है तथा कब्ज दूर करती है।

प्यास में अमरुद के औषधीय गुण एवं उपचार विधि:

प्यास में अमरुद के छोटे-छोटे टुकड़े काटकर पानी में डाल दें। कुछ समय बाद इस पानी को पीने से मधुमेह जन्य या बहुमूत्र जन्य प्यास, तृष्णा में शीघ्र लाभ होता है।

भगंदर में अमरुद के औषधीय गुण एवं उपचार विधि:

1. बच्चों के गुदभ्रंश (भगंदर) रोग पर अमरुद की जड़ की छाल का काढ़ा गाढ़ा-गाढ़ा लगने से लाभ होता है।
2. तीव्र अतिसार में गुदभ्रंश (भगंदर) होने पर अमरुद के ताजे पत्तों की गोली बनाकर पेट पर बाँधने से सूजन कम हो जाती है और गुदा अंदर बैठ जाता है।
3. अमरुद के वृक्ष की छाल, जड़ और पत्ते, 250 ग्राम लेकर कूट कर तथा एक किलोग्राम जल में आग पर पका उबालें, जब आधा जल शेष रह जाये, तब इस काढ़ा से गुदा को बार-बार धोना चाहिए। और उसे अंदर धकेलें। इससे गुदा अंदर चली जायेगी।

पित्त की जलन में अमरुद के औषधीय प्रयोग गुण एवं उपचार विधि:

पित्त की जलन में अमरुद के बीज निकालर पीसकर गुलाब जल और मिश्री में मिलाकर पीने से बढ़े हुए पित्त और विदाह की ठीक हो जाता है।

विशेष

अमरुद के पत्तों के रस को भरपेट पिलाने से या अमरुद खाने से भांग, धतूरा आदि का नशा दूर हो जाता है।

Subject- Guava ya Amrud ke Gun, Amrud ke Aushadhiy Prayog, Amrud ke Fayde, Amrud se Labh, Amrud ke Gharelu Upchar, Amrud ke Aaurvedik Prayog, Amrud ke Aushadhiy Gun evan Sevan Upchar Vidhi.

Comments

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *