Menu

शहद के औषधीय गुण-शहद के धार्मिक, पौराणिक, आयुर्वेदिक विशेषताएं प्रयोग विधि Shahad Ke Gun

शहद के फायदे एवं नुकसान शहद के औषधीय गुण:- शहद में दीर्घायु एवं स्वस्थ बनाये रखने की वैसी ही अद्भुत शक्ति होती है, जैसे जड़ी-बूटियों में शहद मधुमक्खियों द्वारा अनेक प्रकार के वृक्ष आदि के पुष्प लाकर एकत्र किया जाता है। (a) शहद न केवल

नारियल के गुण, नारियल के धार्मिक, पौराणिक, आयुर्वेदिक, वैद्यकी, तांत्रिक गुण

  नारियल के गुण:  नारियल मूत्राशय शोधक, पुष्टिकारक, वीर्यवर्धक, बलवर्धक, रक्तविकार नाशक, दाहशामक तथा वात-पित्त नाशक है, नारियल एक बेहद उपयोगी लाभदायक, देर से पचने वाला, ग्राही (ग्रहण करने वाला), फल है। महिलाओं की खूब सूरती एवं बालों की सुंदरता में नारियल एवं नारियल तेल के प्रयोग

वचा के औषधीय गुण, आयुर्वेदिक उपचार, फायदे एवं नुकसान

वचा की विभिन्न बीमारियों में आयुर्वेदिक उपचार: वचा अधकपारी , सिरदर्द, मस्तक की पीड़ा, स्मरण शक्ति की वृद्धि, भूलने की बीमारी, गले का दर्द, गलगण्ड रोग, अपस्मार (मिर्गी), दमा रोग, खाँसी, सूखी खांसी, हैजा रोग, पेट का अफारा, पेट का दर्द, बच्चो की खांसी, जुकाम,

दिन को होली, रात दिवाली, रोज़ मनाती मधुशाला-HR Bachchan मधुशाला भाग 6

बिना पिये जो मधुशाला को बुरा कहे, वह मतवाला, पी लेने पर तो उसके मुह पर पड़ जाएगा ताला, दास द्रोहियों दोनों में है जीत सुरा की, प्याले की, विश्वविजयिनी बनकर जग में आई मेरी मधुशाला।।२४। हरा भरा रहता मदिरालय, जग पर पड़ जाए

सोम सुरा पुरखे पीते थे, हम कहते उसको हाला-HR Bachchan मधुशाला भाग 10

सोम सुरा पुरखे पीते थे, हम कहते उसको हाला, द्रोणकलश जिसको कहते थे, आज वही मधुघट आला, वेदिवहित यह रस्म न छोड़ो वेदों के ठेकेदारों, युग युग से है पुजती आई नई नहीं है मधुशाला।।५५। वही वारूणी जो थी सागर मथकर निकली अब हाला,

बैर बढ़ाते मस्जिद मन्दिर मेल कराती मधुशाला-HR Bachchan मधुशाला भाग 9

पथिक बना मैं घूम रहा हूँ, सभी जगह मिलती हाला, सभी जगह मिल जाता साकी, सभी जगह मिलता प्याला, मुझे ठहरने का, हे मित्रों, कष्ट नहीं कुछ भी होता, मिले न मंदिर, मिले न मस्जिद, मिल जाती है मधुशाला।।४७। सजें न मस्जिद और नमाज़ी

योगिराज कर संगत उसकी नटवर नागर कहलाए-HR Bachchan मधुशाला भाग 8

साकी बन मुरली आई साथ लिए कर में प्याला, जिनमें वह छलकाती लाई अधर-सुधा-रस की हाला, योगिराज कर संगत उसकी नटवर नागर कहलाए, देखो कैसों-कैसों को है नाच नचाती मधुशाला।।४०। वादक बन मधु का विक्रेता लाया सुर-सुमधुर-हाला, रागिनियाँ बन साकी आई भरकर तारों का

सूर्य बने मधु का विक्रेता, सिंधु बने घट, जल, हाला-HR Bachchan मधुशाला भाग 7

सूर्य बने मधु का विक्रेता, सिंधु बने घट, जल, हाला, बादल बन-बन आए साकी, भूमि बने मधु का प्याला, झड़ी लगाकर बरसे मदिरा रिमझिम, रिमझिम, रिमझिम कर, बेलि, विटप, तृण बन मैं पीऊँ, वर्षा ऋतु हो मधुशाला।।३०। तारक मणियों से सज्जित नभ बन जाए

पंडित, मोमिन, पादिरयों के फंदों को जो काट चुका HR Bachchan मधुशाला भाग 5

धर्मग्रन्थ सब जला चुकी है, जिसके अंतर की ज्वाला, मंदिर, मसजिद, गिरिजे, सब को तोड़ चुका जो मतवाला, पंडित, मोमिन, पादिरयों के फंदों को जो काट चुका, कर सकती है आज उसी का स्वागत मेरी मधुशाला।।१७। लालायित अधरों से जिसने, हाय, नहीं चूमी हाला,

पीड़ा में आनंद जिसे हो, आए मेरी मधुशाला-HR Bachchan मधुशाला भाग 4

लाल सुरा की धार लपट सी कह न इसे देना ज्वाला, फेनिल मदिरा है, मत इसको कह देना उर का छाला, दर्द नशा है इस मदिरा का विगत स्मृतियाँ साकी हैं, पीड़ा में आनंद जिसे हो, आए मेरी मधुशाला।।१४। जगती की शीतल हाला सी