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शहद के औषधीय गुण-शहद के धार्मिक, पौराणिक, आयुर्वेदिक विशेषताएं प्रयोग विधि Shahad Ke Gun

शहद के फायदे एवं नुकसान

ARO AMETHI

शहद के औषधीय गुण:- शहद में दीर्घायु एवं स्वस्थ बनाये रखने की वैसी ही अद्भुत शक्ति होती है, जैसे जड़ी-बूटियों में शहद मधुमक्खियों द्वारा अनेक प्रकार के वृक्ष आदि के पुष्प लाकर एकत्र किया जाता है।

(a) शहद न केवल कामोत्तेजना को बढ़ाता है अपितु आप के धैर्य सेक्सुअल पावर के लिए रामबाण औषधि है।

(b) शहद का सेवन आप के शरीर को सुद्रढ़, सुन्दर, आकर्षक, दीर्धायु, निरोगी बनाने में संजीवनी का काम करती है।

(c) शहद का सेवन बच्चों एवं बृद्ध के लिए अमृत माना गया है।

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मधु में पाए जाने वाले पोषक तत्व: शहद में फ्रूट ग्लूकोज, आयरन, कैल्शियम, फॉस्फेट, सोडियम, क्लोरीन, पोटेशियम और मैग्नीशियम जैसे गुण होते हैं, जो शरीर को बैक्टीरिया से बचाने में मदद करते हैं। साथ ही इसमें एंटीसेप्टिक, एंटीबायोटिक, विटामिन बी1 और बी6 भी भरपूर मात्रा में होते हैं, जोकि सेहत और खूबसूरती दोनों के लिए फायदेमंद है।

शहद का वैदिक, पौराणिक, धार्मिक महत्व: हिन्दू धर्म एवं धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा पाठ, यज्ञ, आहुति, तंत्र, मंत्र, योग, तांत्रिक सिद्धियां एवं अनेक शुभ एवं अशुभ अवसरों तथा देवी देवताओं की पूजा बिना शहद के अधूरी मानी जाती है। इस तरह शहद का धार्मिक, पौराणिक, वैदिक, दैविक, याज्ञिक रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। वैदिक एवं पौराणिक मान्यताओं के अनुसार विशेष कर भगवान शिव की पूजा पाठ में शहद चढाने से धन की वृद्धि होती है।

शहद का पर्यायवाची शब्द: कीलाल, कुसुमासव, पुष्कर, पुष्पासव, भ्रमरज, मकरंद, माक्षिक, शहद, सुधा, रसा।

शहद के औषधीय गुण-शहद के धार्मिक, पौराणिक, वैद्यकी विशेषताएं प्रयोग विधि Shahad Ke Gun

शहद के विभिन्न भाषाओँ में नाम:-

Hindi-शहद

Sanskrit-मधु

English-Honey

Marathi-मध

Punjabi-ਸ਼ਹਿਦ

Bangla-মধু

Gujarati-મધ

Telugu-హనీ

Urdu-شہد

Tamil-ஹனி

Malayalam-തേൻ

Kannada-ಹನಿ

शहद के औषधीय उपचार एवं सेवन विधि

1. मधू से थकावट का इलाज: शहद का सेवन करने से थकावट दूर होकर ताजगी आती है।

2. शहद से काली खाँसी की दवा: काली खाँसी होने पर शहद के साथ दो बादाम खाने से खाँसी ठीक हो जाती है।

3. बवासीर में शहद का प्रयोग: एक चुटकी त्रिफला शहद में मिलाकर चाटने से बवासीर में आराम मिलता है।

4. जलन में मधु का प्रयोग: शरीर के किसी भी भाग के जलने पर शुद्ध शहद लगाने से जलन कम होती है और आराम मिलता है।

5. मांसपेसियों में मधु का सेवन: शहद को नारंगी, दूध, केवड़ा-रस तथा पानी में मिलाकर पीने से मांसपेसियों को तुरंत आराम मिलता है।

6. कब्ज में शहद की सेवन विधि: बिच्छू डंक में शहद से उपचार: बिच्छू के काटे हुए स्थान पर शहद, घृत और चूना बराबर मात्रा में मिलाकर लगाने से जहर उतर जाता है।

7. सहद से हिचकी का इलाज: शहद प्रतिदिन चाटने से कब्ज दूर हो जाता है।

8. हिचकी के लिए रामवाण है शहद: शहद चाटने से हिचकी बंद हो जाती है।

9. मोटापा में शहद से इलाज: प्रातः शौच जाने से पूर्व एक गिलास ठण्डे पानी में दो चम्मच शहद मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से शरीर का मोटापा और भारीपन दूर हो जाता है।

10. घाव की मधु चकित्सा: यदि घाव से खून नहीं बंद हो रहा है तो उस पर शहद लगाना चाहिए।

11. सुजाक में शहद की सेवन विधि: सुजाक रोग में ठण्डे जल के साथ शहद का सेवन करने से आराम मिलता है।

12. अनिद्रा में मधु का प्रयोग: नियमित रूप से शहद का सेवन करने से अनिद्रा की शिकायत दूर हो जाती है।

13. रक्तचाप में शहद की दवा: लहसुन के साथ शहद का प्रयोग करने से रक्तचाप बढ़ाता है।

14. शहद से आंत की दवा: आंतो की शिकायत में आंवले के रस के साथ शहद का सेवन करना चाहिए।

15. शहद से कमजोरी, सुस्ती, निराशा का इलाज: अनार के रस में शहद मिलाकर सेवन करने से दिमागी कमजोरी, सुस्ती, निराशा तथा थकावट दूर होती है।

16. टांसिल: टांसिल बढ़ने पर सेब के रस में शहद मिलाकर लेना चाहिए।

17. शहद के लाभकारी गुण: शहद में फ्रूट ग्लूकोज, आयरन, कैल्शियम, फॉस्फेट, सोडियम, क्लोरीन, पोटेशियम और मैग्नीशियम जैसे गुण होते हैं, जो शरीर को बैक्टीरिया से बचाने में मदद करते हैं। साथ ही इसमें एंटीसेप्टिक, एंटीबायोटिक, विटामिन बी1 और बी6 भी भरपूर मात्रा में होते हैं, जोकि सेहत और खूबसूरती दोनों के लिए फायदेमंद है।

18. शहद आँखों के लिए हितकर: नीम के पेड़ के छत्ते से पाए जाने वाला शहद आँखों के लिए।

19. मधुमेह एवं शहद: जामुन के पेड़ से पाए जाने वाला शहद Diabetes के लिए।

20. ह्रदय रोग एवं मधु: सहजन के पेड़ से पाए जाने वाला शहद ह्रदय रोग और ब्लड-प्रेशर में लाभदायक होता है।

शहद के औषधीय गुण: शहद की अपनी तासीर गर्म होती है। खासकर जिस समय शहद छत्ते से बाहर निकालते है, उस समय इसका प्रभाव गर्म होता है धीरे-धीरे इसका प्रभाव सामान्य होता जाता है। शहद का विशेष गुण यह भी है कि यदि इसे ठण्डे पानी में मिलाकर सेवन करने से ठण्डा किन्तु गर्म पानी में मिलाकर सेवन करने से इसकी तासीर गर्म होती है। सुबह शाम गर्म पानी में शहद मिलाकर सेवन करने से शरीर की चर्बी कम होती है। एक बूँद शहद प्रतिदिन आँखों में डालने से आँख की ज्योति बढ़ती है तथा आँखों की प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। अदरक या तुलसी के इस को चम्मच में गरम कर उसमें शहद मिलाकर उपयोग करने पर खाँसी-जुकाम ठीक होता है। शहद जितना जल्दी पचता है, उतना जल्दी अन्य कोई पदार्थ नहीं पचता। अनुपात के रूप में शहद का सेवन करने से औषधि की शक्ति बढ़ती है। शहद और नींबू का रस लगाने से चेचक के दाग मिटते है और चेहरे की क्रांति लौट आती है। केवल शहद नित्य सेवन करने से दिल एवं दिमाग को शक्ति मिलती है और आयु की वृद्धि होती है। जयादा पुराना शहद अपना स्वाद, गुण एवं रंग खो देता है। इसलिए ताजे शहद का प्रयोग अधिक करना चाहिए। शहद का प्रयोग विशेषकर बच्चों और बूढ़ों को अधिक करना चाहिए। Shahad ke Gun, Aushadhi, Fayade, Nuksan aur Aushadhiya Prayog in Hindi. Sahad ke Vaidiki, Aushadiya, Pouranik, Dharmik, Ayurvedik Gun Labh aur haniyan.

शुद्ध शहद की पहचान: शहद आदि काल से ही द्रव्य का प्रतिनिधि रहा है इसके प्रयोग से ही इसकी उपयोगिता एवं औषधीय गुणों की जानकारी होती है शहद में कई तत्व विद्यमान है। जिसमें ग्लूकोज तथा फ्रक्टोज पर्याप्त मात्रा में मिलता है। शुद्ध शहद पानी में अपने आप नहीं घुलता, जबकि चीनी थोड़ी देर में स्वतः ही घुल जाती है। जो शहद जितना गाढ़ा होगा, उसमें नमी की जितनी कमी होगी, शुद्धता की दृष्टि से वः उतना ही अच्छा माना जाता है। शहद ठण्डी में जम जाता है और गर्मी में स्वतः पिघल जाता है शहद की ऋतुविशेष, वनस्पति या पुष्पविशेष के रूप में भी पहचान की जाती है। हिमालय का कार्तिक मधु औषधि गुणों से युक्त है। इस ऋतु का शहद जमने पर सफेद, दानेदार तथा सुगंधित होता है। इसको खाने से गले में हल्की मिर्च जैसा स्वाद लगता है। यह कम मिलता है। फाल्गुन-चैत में तैयार होने वाले सरसों के फूलों का शहद भी इसी के समान होता है। वैशाख और ज्येष्ठ मास का शहद लाल रंग का होता है जो कम जमता है, यह सुगंधित होता है। आषाढ़ महीने का शहद भी लाल रंग का होता है। कहीं-कहीं स्वाद में कडुवा होता है। इस शहद का अधिक प्रयोग करने से शरीर में गर्मी दिखाता है। कई बार इससे पेचिस भी लग जाती है।

शहद के नुकसान-

1. माँस-मछली के साथ शहद का सेवन विष के समान हो जाता है इसलिए माँस-मछली के साथ भी शहद न खायें।

2. घी, मक्खन के साथ शहद का प्रायः नहीं करना चाहिए।

3. आमतौर पर शहद एक वर्ष से अधिक उम्र के बच्‍चों से लेकर वयस्‍कों तक के लिए सुरक्षित है यह त्‍वचा के लिए वयस्‍कों के लिए ज्‍यादा उपयुक्‍त है।

4. यह छोटे बच्चे जो एक वर्ष से छोटे है उनके लिए सुरक्षित नही है क्‍योंकि इससे बोटुलिज्‍म विषाक्‍तता का खतरा बढ़ जाता है।

5. यदि आपको पराग से एलर्जी (pollen allergy) है तो आप शहद का सेवन करने से बचें क्योंकि शहद का उपयोग करने से आपकी एलर्जी प्रतिक्रियाएं बढ़ सकती है।

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