Menu

मनोरंजन Archive

दिन को होली, रात दिवाली, रोज़ मनाती मधुशाला-HR Bachchan मधुशाला भाग 6

बिना पिये जो मधुशाला को बुरा कहे, वह मतवाला, पी लेने पर तो उसके मुह पर पड़ जाएगा ताला, दास द्रोहियों दोनों में है जीत सुरा की, प्याले की, विश्वविजयिनी बनकर जग में आई मेरी मधुशाला।।२४। हरा भरा रहता मदिरालय, जग पर पड़ जाए पाला, वहाँ मुहर्रम का तम छाए, यहाँ होलिका की ज्वाला, स्वर्ग

सोम सुरा पुरखे पीते थे, हम कहते उसको हाला-HR Bachchan मधुशाला भाग 10

सोम सुरा पुरखे पीते थे, हम कहते उसको हाला, द्रोणकलश जिसको कहते थे, आज वही मधुघट आला, वेदिवहित यह रस्म न छोड़ो वेदों के ठेकेदारों, युग युग से है पुजती आई नई नहीं है मधुशाला।।५५। वही वारूणी जो थी सागर मथकर निकली अब हाला, रंभा की संतान जगत में कहलाती ‘साकीबाला’, देव अदेव जिसे ले

बैर बढ़ाते मस्जिद मन्दिर मेल कराती मधुशाला-HR Bachchan मधुशाला भाग 9

पथिक बना मैं घूम रहा हूँ, सभी जगह मिलती हाला, सभी जगह मिल जाता साकी, सभी जगह मिलता प्याला, मुझे ठहरने का, हे मित्रों, कष्ट नहीं कुछ भी होता, मिले न मंदिर, मिले न मस्जिद, मिल जाती है मधुशाला।।४७। सजें न मस्जिद और नमाज़ी कहता है अल्लाताला, सजधजकर, पर, साकी आता, बन ठनकर, पीनेवाला, शेख,

योगिराज कर संगत उसकी नटवर नागर कहलाए-HR Bachchan मधुशाला भाग 8

साकी बन मुरली आई साथ लिए कर में प्याला, जिनमें वह छलकाती लाई अधर-सुधा-रस की हाला, योगिराज कर संगत उसकी नटवर नागर कहलाए, देखो कैसों-कैसों को है नाच नचाती मधुशाला।।४०। वादक बन मधु का विक्रेता लाया सुर-सुमधुर-हाला, रागिनियाँ बन साकी आई भरकर तारों का प्याला, विक्रेता के संकेतों पर दौड़ लयों, आलापों में, पान कराती

सूर्य बने मधु का विक्रेता, सिंधु बने घट, जल, हाला-HR Bachchan मधुशाला भाग 7

सूर्य बने मधु का विक्रेता, सिंधु बने घट, जल, हाला, बादल बन-बन आए साकी, भूमि बने मधु का प्याला, झड़ी लगाकर बरसे मदिरा रिमझिम, रिमझिम, रिमझिम कर, बेलि, विटप, तृण बन मैं पीऊँ, वर्षा ऋतु हो मधुशाला।।३०। तारक मणियों से सज्जित नभ बन जाए मधु का प्याला, सीधा करके भर दी जाए उसमें सागरजल हाला,

पीड़ा में आनंद जिसे हो, आए मेरी मधुशाला-HR Bachchan मधुशाला भाग 4

लाल सुरा की धार लपट सी कह न इसे देना ज्वाला, फेनिल मदिरा है, मत इसको कह देना उर का छाला, दर्द नशा है इस मदिरा का विगत स्मृतियाँ साकी हैं, पीड़ा में आनंद जिसे हो, आए मेरी मधुशाला।।१४। जगती की शीतल हाला सी पथिक, नहीं मेरी हाला, जगती के ठंडे प्याले सा पथिक, नहीं

सुन, कलकल़, छलछल़ मधुघट से गिरती प्यालों में हाला-HR Bachchan मधुशाला भाग 3

सुन, कलकल़ , छलछल़ मधुघट से गिरती प्यालों में हाला, सुन, रूनझुन रूनझुन चल वितरण करती मधु साकीबाला, बस आ पहुंचे, दुर नहीं कुछ, चार कदम अब चलना है, चहक रहे, सुन, पीनेवाले, महक रही, ले, मधुशाला।।१०।  जलतरंग बजता, जब चुंबन करता प्याले को प्याला, वीणा झंकृत होती, चलती जब रूनझुन साकीबाला, डाँट डपट मधुविक्रेता

मदिरालय जाने को घर से चलता है पीनेवला-HR Bachchan मधुशाला भाग 2

मदिरालय जाने को घर से चलता है पीनेवला, ‘किस पथ से जाऊँ?’ असमंजस में है वह भोलाभाला, अलग-अलग पथ बतलाते सब पर मैं यह बतलाता हूँ – ‘राह पकड़ तू एक चला चल, पा जाएगा मधुशाला।’। ६। चलने ही चलने में कितना जीवन, हाय, बिता डाला! ‘दूर अभी है’, पर, कहता है हर पथ बतलानेवाला,

पाठकगण हैं पीनेवाले, पुस्तक मेरी मधुशाला-HR Bachchan मधुशाला भाग 1

मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला, प्रियतम, अपने ही हाथों से आज पिलाऊँगा प्याला, पहले भोग लगा लूँ तेरा फिर प्रसाद जग पाएगा, सबसे पहले तेरा स्वागत करती मेरी मधुशाला।।१। प्यास तुझे तो, विश्व तपाकर पूर्ण निकालूँगा हाला, एक पाँव से साकी बनकर नाचूँगा लेकर प्याला, जीवन की मधुता तो तेरे ऊपर

अटल जी की प्रेम कथा, जब दिल दे बैठे राजकुमारी को.. Love Story of AB Vajpayee in Hindi

अटल बिहारी बाजपेयी की प्रेम कथा Love Story of AB Vajpayee: जिंदगी एक खूबसूरत यात्रा होती है। खूबसूरत मोड़ों के साथ, क्या पता किस मोड़ का कौन सा खूबसूरत लम्हा आपकी जिंदगी बदल दे। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जिंदगी में जब वो लम्हा आकर गुजरा तो वो उदास हुए, उन्हें लगा