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Choti Katne Ke Rahasya चोटी कटने के रहस्य


Choti Katne Ka Rahasya: अब तो दिन दहाड़े पुरुषों की भी चोटिया कट रहीं है। चोटी कटने की रहस्यमय घटनाओं में समूचे मध्य भारत के लोग दहशत में हैं। उत्तराखंड, यू पी, एम पी, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, लखनऊ, आगरा, मथुरा, इलाहाबाद आदि जनपद में चोटी कटने की अफवाहों का बाजार गर्म है। विशेष कर उत्तर प्रदेश के जनपद प्रतापगढ़ के लोग बहुत ज्यादा भयभीत हैं यहाँ पर 15-20 चोटियां प्रतिदिन कटने का अनुमान है।

दिन दहाड़े कटी जवान की चोटी: प्रतापगढ़ जनपद के 30 वर्षीय सुरेंद्र यादव पुत्र श्री सत्य नारायण यादव ग्राम हाता पूरे छत्तू, पोस्ट दखावापुर जनपद प्रतापगढ़ की छोटी दिनांक 9 अगस्त को साम 4 बजकर 35 मिनट पर अपने चाचा श्री राजाराम यादव से बातें कर रहे थे उनके चाचा तखत पर बैठे थे और वे स्वयं चारपाई पर थे, देखते देखते उनकी चोटी कट कर गिर गयी। उनकी चोटी काफी बड़ी थी जिसकी सेवा वे बहुत दिन से कर रहे थे। चोटी कटने के बाद वे बेहोस हो गए उन्हें सरकारी गाड़ी से संग्रामगढ़ अस्पताल ले जाना पड़ा।

नहीं काम आई सरकारी दवा: उपचार के उपरांत उन्हें घर भेज दिया गया लेकिन उनकी तबियत में सुधार नहीं हुआ। कैसे न कैसे समय कटा लेकिन 11 अगस्त की सुबह होते होते वे पुनः अचेत हो गए तो उन्हें प्राइवेट वाहन से जिला अस्पताल प्रतापगढ़ ले जाया गया। वहां भी प्राथमिक उपचार के पश्चात उन्हें वापस भेज दिया गया। आज १२ अगस्त को भी उनके पिता एवं शाले श्री तूफान सिंह जो की इंटर कालेज के अध्यापक हैं, उन्हें बेहोसी की हालत में प्राइवेट वाहन से दवा करने के लिए प्राइवेट डाक्टर के चक्कर काट रहें हैं। पढ़ें लाखों के इनाम के चक्कर मे कटती चोटियाँ

चोटी काटने की घटनाओं का रहस्य

  • उत्तरी एवं मध्य भारत के हरियाणा और राजस्थान उत्तर प्रदेश पंजाब लगभग 150 से अधिक महिलाओं ने शिकायत की है कि किसी ने उन्हें बेहोश कर रहस्यमयी तरीके से उनके बाल काट लिए। इस रहस्य को सुलझाने में पुलिस अब तक नाकाम रही है जबकि यहां की महिलाएं इससे डरी हुई और चिंतित हैं।
  • हरियाणा में गुड़गांव के भीमगढ़ इलाके की 53 वर्षीय सुनीता देवी ने कहा, “एक तेज़ फ़्लैश लाइट से मैं बेहोश हो गई। एक घंटे बाद मुझे पता चला कि मेरे बाल काट लिए गए थे।”
  • इस “काल्पनिक हजाम” की पहली ख़बर जुलाई में राजस्थान से आई थी, लेकिन अब इस तरह की ख़बरें उत्तर प्रदेश, हरियाणा और यहां तक कि राजधानी दिल्ली से भी आने लगी हैं।
  • शुक्रवार को उन पर हुए हमले के बाद से वो डरी हुई हैं. उन्होंने कहा, “न मैं सो पा रही हूं और न किसी काम में मेरा मन लग रहा है। मैंने सुना था कि इस तरह की घटनाएं राजस्थान में हो रही हैं, लेकिन कभी सोचा नहीं था कि यहां भी ऐसा होगा”।
  • सुनीता देवी किसानों और व्यापारियों के एक छोटे से समुदाय में रहती हैं। जब तक वो सदमे से उबर नहीं जातीं, उनके कुछ पड़ोसी बारी-बारी से उनके साथ रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनपर हमला करने वाला एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति था जिसने चमकीले कपड़े पहन रखे थे।
  • उन्होंने कहा, “जब रात के 9.30 बजे मुझ पर हमला हुआ तो मैं ग्राउंड फ़्लोर पर अकेली थी और मेरी बहू और पोता ऊपर थे. उन्होंने न कुछ देखा और न ही कुछ सुना”
  • रहस्य तब और गहरा जाता है जब यह पूछा जाता है कि किसी ने हमलावर को देखा है क्या?
  • सुनीता देवी की पड़ोसी मुनेश देवी ने कहा कि आमतौर पर रात 9 से 10 बजे के बीच इस पतली गली में लोगों की चहल-पहल रहती है।
  • लोग खाना खाने के बाद एक साथ बैठते हैं, आराम करते हैं। शुक्रवार को कुछ अलग नहीं था, लेकिन हम में किसी ने भी किसी अज्ञात व्यक्ति को सुनीता के घर में आते-जाते नहीं देखा” और यह यहीं खत्म नहीं हुआ।
  • कुछ गज की ही दूरी पर एक और गृहिणी आशा देवी ने भी उसी दिन इसी तरह के एक हमले में अपने बाल खो दिए.
  • लेकिन इस बार हमलावर कथित तौर पर एक महिला थी।
  • आशा देवी के ससुर सूरज पाल कहते हैं कि इस घटना के बाद उन्होंने आशा और घर की अन्य महिलाओं को उत्तर प्रदेश में एक रिश्तेदार के घर पर भेज दिया है।
  • उन्होंने कहा, “इस हमले के बाद वो भयभीत थीं, मैंने उन्हें कुछ हफ़्तों के लिए घर से दूर रहने को कहा। पूरे समुदाय में डर बना हुआ है”।
  • सूरज पाल ने कहा कि उस दिन वो घर पर थे जबकि आशा देवी रात 10 बजे के आसपास घर के किसी काम से बाहर थीं।
  • उन्होंने बताया, “जब वो आधे घंटे तक नहीं लौटीं तब मैं उन्हें ढूंढने निकला । वो हमें बाथरूम में बेहोश मिलीं. उनके सिर के कटे बाल ज़मीन पर बिखरे पड़े थे”।
  • उन्होंने कहा कि क़रीब एक घंटे के बाद होश आने पर आशा ने बताया कि उन पर किसी महिला ने हमला किया था.
  • सूरज पाल ने आगे कहा, “उन्होंने मुझसे कहा कि सब कुछ केवल 10 सेकेंड में ही हो गया।”
  • इसी तरह के कुछ मामले मैंने गुड़गांव से 70 किलोमीटर दूर रेवाड़ी जिले के ग्रामीण इलाकों में भी देखे।

आख़िर आया सामने चोटी काटने का सच हिस्टीरिया की बीमारी

उपरोक्त में से कुछ इस प्रकार से हैं

  • प्रतपगढ़ के सुरेंद्र का कहना है की कटी चोटी देखने के बाद वे बेहोस हो गए उन्हें कुछ याद नहीं है जब की उनके चाचा वहीँ मौजूद थे वे ही उन्हें अस्पताल ले गए।
  • जोनवासा गांव की 28 वर्षीय रीना देवी ने कहा कि उन पर गुरुवार को हमला हुआ और इस बार हमलावर एक बिल्ली थी। उन्होंने कहा, “मैं अपना काम कर रही थी तभी मैंने एक बड़ी आकृति देखी, यह बिल्ली के जैसी थी। तब मैंने महसूस किया कि किसी ने मेरे कंधे को छुआ और ये ही आख़िरी बात मुझे याद है” ।वो मानती हैं कि उनकी कहानी पर विश्वास करना मुश्किल है. वो कहती हैं, “मैं जानती हूं कि ये असंभव सा लगता है। लेकिन मैंने यही देखा. कुछ लोग कहते हैं कि मैंने खुद अपने बाल काट लिए हैं. लेकिन मैं ऐसा क्यों करूंगी”।
  • पड़ोस के खड़खड़ा गांव में 60 साल की सुंदर देवी शनिवार को उनपर हुए हमले के बाद से ही बिस्तर पर पड़ी हैं. वो कहती हैं, “मैं पड़ोसी के घर जा रही थी जब किसी ने पीछे से मेरे कंधे को थपथपाया। मैं पीछे मुड़ी तो कोई नहीं था. मुझे इसके बाद क्या हुआ याद नहीं है”।
  • 28 वर्षीय रीमा देवी का कहना है कि गुरुवार को जब उनके बाल काटे गए तो वो अपने फ़ोन पर गेम खेल रही थीं. मेरे पति और बच्चे भी उस वक्त कमरे में ही थे। मुझे मेरे बालों पर खिंचाव महसूस हुआ, जब मैं पीछे मुड़ी तो मेरे बाल फ़र्श पर पड़े हुए थे”।

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